देश में कोरोना संकट, गरीब को खाने की चिंता, अधिकारी लापरवाह

कोरोना में फँसे लोगों को मदद और सुविधा देने के नाम पर राज्य में अधिकारियों की लापरवाही,फेंक दिए 2000 खाने के पैकेट।

कवर्धा-जिले में प्रशासनिक लापरवाही के चलते फेंके गए खाने के 2000 पैकेट अधिकारियों ने बाँधी चुप्पी। यहाँ लोगों को लॉकडाउन के चलते दो वक्त का भोजन सही तरीके से नशीब नहीं हो रहा है और ऐसे परिस्थितियों में खाने के 2000 पैकेट फेंके जा रहे है। मामला बोड़ला तहसील का जहाँ कोटा से वापस आने वाले विद्यार्थियों के लिए जिला प्रशासन ने खाने का व्यवस्था किया हुआ था।

मगर कोटा से कबीरधाम जिले पहोचने के पहले ही यहाँ जिला प्रशासन अपने खाने के व्यवस्था के साथ तैयार बैठा था ,और व्यवस्था की जिम्मेदारी में पूरा जिला प्रशासन इतने व्यस्त हो गए की खाने की धुन और व्यस्तता में समय का आंकलन करना या जानकारी लेना ही भूल बैठा की आने वाले विद्यार्थी कब और कितने समय में कबीरधाम पहोचेंगे।

जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने 26 तारीख रात को ही खाना बनाने के निर्देश दे दिया था जिसके बाद आर्डर लेने वाले ने 27 दोपहर को ही 2500 सौ खाने के पैकेट जिम्मेदारों को सौप दिया था। मगर कोटा से कबीरधाम पहोचने वाले विद्यार्थियों की प्रोटोकॉल और समय के बारे में सही जानकारी लेना भूल बैठे जिसके बाद प्लास्टिक को प्रतिबंध करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने ही प्लास्टिक में पैक खाने को खराब होने की बात कहकर खुले में फेंकवा दिए। और इधर इस कारनामे के बाद अधिकारी पत्रकारों के सवालों का जवाब देना तो दूर किसी भी विषय में ना तो चर्चा करने के लिए तैयार है और नाही फ़ोन उठाने के लिए।

और हालही में छत्तीसगढ़ सरकार की बात करें तो ऐसे ही आर्थिक तंगी को लेकर परेशान है और यहाँ अधिकारी लापरवाही में लापरवाही और मनमानी करने में बाज नहीं आ रहे है। अब देखना ये होगा की आर्थिक तंगी से जूझ रही राज्य सरकार ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्यवाई करता है।

आप हमें फ़ेसबुकट्विटरटेलीग्राम और व्हाट्सप्प पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.