EXCLUSIVE : टिड्डियों के दल ने छत्तीसगढ़ में दी दस्तक, खतरे की आशंका


द भारत लाइव । टिड्डियों का दल छत्तीसगढ़ में भी दस्तक दे दी है। राजस्थान से होते हुए मध्यप्रदेश पहुंचकर लाखों एकड़ फसल तबाह करने वाले टिड्डी दल का प्रवेश छत्तीसगढ़ में हो गया है। खबर है कि छत्तीसगढ़ के कोरिया से लगे इलाकों में टिड्डियों के दल ने प्रवेश कर लिया है। टिड्डी दल का यह हमला करीब 6 बजे हुआ है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार टि़ड्डियों को उनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से उन्हें पहचाना जा सकता है। टिड्डी जब अकेली होती है तो उतनी खतरनाक नहीं होती है। लेकिन, झुंड में रहने पर इनका रवैया बेहद आक्रामक हो जाता है। फसलों को एकबारगी सफाया कर देती हैं। आपको दूर से ऐसा लगेगा, मानो आपकी फसलों के ऊपर किसी ने एक बड़ी-सी चादर बिछा दी हो। कुछ समय पहले अफ्रीकी देशों में इन्होंने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया हैं।

बचाव के उपाय

वैज्ञानिकों के मुताबिक किसान भाई टिड्डी दल से बचने के लिए कई उपाय अपना सकते हैं। फसल के अलावा, टिड्डी कीट जहां इकट्ठा हो, वहां उसे फ्लेमथ्रोअर से जला दें। टिड्डी दल को भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़़े, लाउटस्पीकर या दूसरी चीजों के माध्यम से शोरगुल मचाएं। जिससे वे आवाज सुनकर खेत से भाग जाएं, और अपने इरादों में कामयाब ना हो पाएं।

टिड्डों ने जिस स्थान पर अपने अंडे दिये हों, वहां 25 कि.ग्रा 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनालफॉस को मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़कें। टिड्डी दल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए 100 कि.ग्रा धान की भूसी को 0.5 कि.ग्रा फेनीट्रोथीयोन और 5 कि.ग्रा गुड़ के साथ मिलाकर खेत में डाल दें। इसके जहर से वे मर जाते हैं।

टिड्डी दल के खेत की फसल पर बैठने पर, उस पर 5 प्रतिशत मेलाथीयोन या 1.5 प्रतिशत क्विनाल्फोस का छिड़काव करें। कीट की रोकथाम के लिए 50 प्रतिशत ई.सी फेनीट्रोथीयोन या मेलाथियोन अथवा 20 प्रतिशत ई.सी. क्लोरपाइरिफोस 1 लीटर दवा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में छिड़काव करे

टिड्डी दल सवेरे 10 बजे के बाद ही अपना डेरा बदलता है। इसलिए, इसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनालफॉस का छिड़काव करें।

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