झिरम घाटी हमला : नंदकुमार पटेल को हो गया था अनहोनी का पूर्वाभास, साथियों से कही थी ये बात


द भारत लाइव।
आज झीरम नरसंहार की बरसी है। सात साल पहले कांग्रेस के नेताओं की एक पीढ़ी को नक्सलियों ने अपनी गोलियों से भून दिया था। प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस नेता परिवर्तन यात्रा पर निकले थे और छह महीने बाद ही विधानसभा चुनाव होना था। कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल अपनी पूरी टीम के साथ परिवर्तन यात्रा में सरकार को कोस रहे थे और सरकार के कामकाज पर सवाल खड़ा कर रहे थे।

परिवर्तन यात्रा में सभा को समाप्त करके कांग्रेस नेताओं का काफिला 25 मई की शाम को सुकमा के रेस्ट हाउस पहुंचा। रेस्ट हाउस में प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और अन्य नेताओं ने खाना खाया और काफिला जगदलपुर के लिए आगे रवाना हो गया।

झीरम हत्याकांड के समय नंदकुमार पटेल के काफिले में शामिल कांग्रेस नेताओं की मानें तो नंद कुमार पटेल को पहले ही आभास हो गया था कि कुछ अनहोनी होने वाली है। जब वह सभा को संबोधित कर रहे थे, उस दौरान गिने-चुने एक दो पुलिसकर्मी थे। उसी समय उनके चेहरे के हाव भाव बता रहे थे कि कुछ गड़बड़ होने वाली है।

सभा समाप्त करने के बाद पटेल सीधे रेस्ट हाउस पहुंचे और वहां सभी साथियों को जल्दी खाना खाकर जगदलपुर रवाना होने के लिए कहने लगे। नेताओं ने बताया कि जगदलपुर से सुकमा आने के दौरान पटेल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विद्याचरण शुक्ला की गाड़ी में साथ आए, लेकिन जब लौटने का समय आया तो नंद कुमार पटेल की गाड़ी में मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे दिनेश पटेल ही थे।

सुकमा रेस्ट हाउस में विद्याचरण शुक्ला को अलग गाड़ी से रवाना किया गया। यह पहला मौका था, जब पटेल के बेटे दिनेश पटेल पहली बार परिवर्तन यात्रा की किसी सभा के मंच पर बैठे। यही नहीं घटना से पहले दिनेश पटेल तीन दिन तक बीमार थे और वह जगदलपुर में ही रुके थे, लेकिन जिस दिन घटना हुई, उस दिन दिनेश अपने पिता नंद कुमार के साथ परिवर्तन यात्रा में शामिल हुए। कांग्रेसी नेता इसे संयोग ही बताते हैं।

नक्सलियों ने पूछा था, कौन है नंद कुमार

झीरम हमले में गोली लगने से घायल हुए कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश सचिव शिव सिंह ठाकुर ने बताया कि नक्सलियों ने एक-एक करके सभी लोगों को एक पहाड़ पर लेटने का निर्देश दिया।

नक्सली पूछ रहे थे कि इसमें नंद कुमार पटेल कौन है। पहाड़ पर गोली लगने से घायल डॉ शिवनारायण द्विवेदी और डॉ विवेक वाजपेयी ने नक्सलियों से कहा कि इसमें नंद कुमार कोई नहीं है। जहां कांग्रेसी नेता लेटे थे, उससे 10 कदम दूरी पर महेंद्र कर्मा की बॉडी पड़ी थी। शिवनारायण द्विवेदी ने इसकी पहचान की और बताया कि यह महेंद्र कर्मा हैं। नक्सली सभी को लेटे रहो बोलकर आगे बढ़ गए।

नक्सलियों ने कहा सरेंडर करो

गोलीबारी के कारण पूरे क्षेत्र में धुआं-धुआं हो गया था। सभी गाड़ियां रुक गई थी। जब तक नंदकुमार पटेल और महेंद्र कर्मा की पहचान नहीं कर ली गई, नक्सली गोली चला रहे थे। उसके बाद नक्सलियों ने हर गाड़ी को बंदूक के बट से ठोका और बोले बाहर निकलकर सरेंडर करो।

कांग्रेस नेताओं ने इस हत्याकांड को सुपारी किलिंग बताया। काफिले में शामिल गाड़ी में शिवसिंह ठाकुर को पीठ में, मोतीलाल साहू को जांघ पर और सुरेंद्र शर्मा को घुटने में गोली लगी थी। अंजय शुक्ला सहित चार लोग उस गाड़ी में सवार थे।

साभार : मृगेंद्र पांडेय रायपुर

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