चिकित्सा संस्थानों के लिए प्राथमिकता से दें पर्यावरण विभाग की अनुमति : मंत्री अकबर

पर्यावरण मंत्री ने विभागीय काम-काज की समीक्षा की

सभी बड़े उद्योगों का निरीक्षण कार्य 15 जुलाई तक अनिवार्यतः करने के निर्देश

रायपुर, 13 जून 2020/ वन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने आज राजधानी के शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में पर्यावरण संरक्षण मंडल के समस्त क्षेत्रीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बैठक में समीक्षा करते हुए पर्यावरण विभाग को चिकित्सकीय संस्थानों की स्थापना तथा संचालन के लिए तत्परता से सम्मति प्रदान करने के लिए सख्त निर्देश दिए। साथ ही पर्यावरण विभाग के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को टीम बनाकर अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत समस्त बड़े तथा मध्यम उद्योगों और बड़े खदानों का निरीक्षण कार्य आगामी 15 जुलाई तक हर हालत में पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री अकबर ने बैठक में समीक्षा के दौरान प्रदेश में एक जनवरी से 31 मई 2020 तक उद्योग स्थापना तथा संचालन की सम्मति के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों की जानकारी ली और लंबित प्रकरणों को तत्परता से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से रोकथाम संबंधी उपायों के मद्देनजर राज्य में चिकित्सकीय संस्थानों के स्थापना तथा संचालन के लिए प्राप्त आवेदनों पर पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा प्राथमिकता से सम्मति प्रदान करने की कार्यवाही की जाए।

बैठक में श्री अकबर ने राज्य में जल तथा वायु प्रदूषण के तहत उल्लंघनकारी उद्योगों को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए मंडलवार जारी निर्देशों और अब तक हुई राशि की वसूली के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल रायपुर के अंतर्गत घड़ी डिटरजेंट पाउडर के निर्माता मेसर्स आर.एस.पी.एल. लिमिटेड – अछोली द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की बकाया राशि एक करोड़ 14 लाख रूपए अब तक जमा नहीं किया गया है। श्री अकबर ने इसे गंभीरता से लेते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव को मेसर्स आर.एस.पी.एल. लिमिटेड के खिलाफ तत्काल एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए और कमेटी द्वारा इसकी जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर हर हालत में प्र्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में एक जनवरी से 31 मई 2020 तक उद्योगों की स्थापना सम्मति तथा संचालन सम्मति के लिए 370 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, इनमें से 180 प्रकरणों को निराकृत कर दिया गया है। इसके तहत सबसे अधिक आवेदन पत्र रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय में 127 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से अब तक 66 प्रकरणों को निराकृत कर दिया गया है। इसी तरह क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर में 35, भिलाई में 110, अम्बिकापुर में 31, जगदलपुर में 30, कोरबा में 7 और रायगढ़ में 30 आवेदन पत्र प्राप्त हुए। बैठक में सचिव सुश्री संगीता पी. तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री आर.पी. तिवारी उपस्थित थे।

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