हाथरस गैंगरेप : वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही दलित युवती, रेप के बाद जीभ काटी, रीढ़ की हड्डी भी तोड़ी.. पुलिस की भूमिका संदिग्ध

अलीगढ़ : निर्भया गैंगरेप की तरह उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना से एक बार फिर पूरा देश दहल उठा है. दलित युवती के साथ हुई हैवानियत से यह साफ है कि निर्भया के दोषियों को फांसी मिलने के बाद भी समाज में जरा भी सकारात्मक बदलाव नहीं हुआ. बल्कि रेप की घटनाएं और भी बढ़ती गई है.

हैवानों ने युवती के साथ न सिर्फ गैंगरेप किया, उसे शारीरिक प्रताड़ना भी दी. उसके जीभ काट दिए गए, उसकी हत्या करने का प्रयास भी किया गया. पीड़िता अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है. वह अभी सफदरगंज अस्पताल में वेंटिलेटर पर है.

क्या हुआ था उस दिन..

14 सितंबर की सुबह एक आम सुबह की तरह थी. लड़की अपनी मां के साथ पशुओं का चारा लेने खेतों पर गई थी. तभी गांव के कुछ युवक आए और उसे अपनी हवस का शिकार बनाने लगे. इस दौरान लड़की ने अपने आप को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी चार युवकों के आगे एक न चली. वहीं चिल्लाने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रही उसकी मां आ पहुंची और चारों युवक भाग निकले.

लड़की की हालत नाजुक

 

लड़की की मां ने आसपास के लोगों से मदद मांगी और लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया और पुलिस को सूचना दी. लड़की ने अपने बयान में बताया कि गैंगरेप के बाद उसकी हत्या का प्रयास किया गया. मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि लड़की की गर्दन को बेदर्दी से मरोड़ा गया था. जिसकी वजह से सर्वाइकल स्पाइन इंजरी हो गई है.

 

बता दें इसमें मरीज के गर्दन के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता है. सांस लेने में भी दिक्कत होती है. इस कारण ही उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. लड़की की जीभ भी कटी पाई गई थी.

 

हाथरस में गैंगरेप की शिकार दलित लड़की की हालत नाजुक है। उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है।

 

पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल

 

हाथरस पुलिस ने अब तक इस मामले में संदीप, रामकुमार, लवकुश और रवि नाम के चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है. चारों ही तथाकथित उच्च जाति के है. हालांकि दलित संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में लीपापोती करने की कोशिश की.

 

पहले सिर्फ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया. एक ही व्यक्ति को अभियुक्त बनाया गया. दस दिनों तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया. जब दलित नेता चंद्रशेखर ने ट्वीट किया और अलीगढ़ जाने का ऐलान किया तब अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया. गैंगरेप की धारा भी बाद में जोड़ी गई. हालांकि पुलिस का कहना है कि परिवार ने जो शिकायत दी थी उसी के आधार पर पहला मुकदमा दर्ज किया गया था और बाद में पीड़िता के बयान के आधार पर गैंगरेप का मुकदमा दर्ज किया गया.

 

पीड़िता को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. जहां पुलिस 19 सितंबर को उसका बयान लेने के लिए पहुंची थी. यानी घटना के 5 दिन बाद. उस दिन पीड़िता की हालत गंभीर थी और वो अपना बयान दर्ज नहीं करा सकी थी. फिर 21 और 22 सितंबर को सर्किल ऑफिसर और महिला पुलिस कर्मी पीड़िता का बयान लेने पहुंचे थे.

आप हमें फ़ेसबुकट्विटरटेलीग्राम और व्हाट्सप्प पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.