दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला : करीब 3 हजार लोगों की हुई थी मौत.. आज ही के दिन 19 साल पहले की वो खौफनाक सुबह

नई दिल्ली : आज ही के दिन 19 साल पहले वो खौफनाक सुबह हुई थी जिसने करीब 3 हजार लोगों की जान ले ली थी. इस सुबह को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला कहा जाए तो गलत नहीं होगा. आज की तारीख अमेरिका के इतिहास में दर्ज है. 11 सितंबर 2001 अमेरिकी इतिहास का सबसे काला दिन है.

उस सुबह को कोई भी भूला नहीं है जब रोज़ की तरह दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर में भी करीब 18 हजार कर्मचारी रोजमर्रा का काम निपटाने में जुटे थे, लेकिन सुबह 8:46 मिनट पर कुछ ऐसा हुआ कि अब तक सामान्य सी मालुम पड़ रही यह सुबह खौफनाक हो उठी.

9/11 की वो घटना जिससे दहल गई थी दुनिया

उस दिन 19 अल कायदा आतंकियों ने 4 पैसेंजर एयरक्राफ्ट हाईजैक किए थे और जानबूझकर उनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा बिल्डिंग के अंदर काम करने वाले हजारों लोग भी मारे गए. हमला जिन विमानों से किया गया उनकी रफ्तार 987.6 किमी/घंटा से ज्यादा थी. दोनों इमारतें दो घंटे के अंदर ढह गए, पास की इमारतें नष्ट हो गईं और अन्य क्षतिग्रस्त हुईं.

इसके बाद उन्होंने तीसरे विमान को वाशिंगटन DC के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया. वाशिंगटन DC की ओर टारगेट किए गए चौथे विमान के कुछ यात्रियों एवं उड़ान चालक दल द्वारा विमान का नियंत्रण फिर से लेने के प्रयास के बाद, विमान ग्रामीण पेंसिल्वेनिया में शैंक्सविले के पास एक खेत में क्रैश होकर गिरा. हालांकि किसी भी उड़ान से कोई भी जीवित नहीं बच सका.

2 घंटे में मलबे के ढेर में बदल गया ट्विन टावर

इस खौफनाक हमले में 2996 लोगों की जान चली गई थीं, जिनमें 400 पुलिस अफसर और फायरफाइटर्स भी शामिल थे. मरने वालों में 57 देशों के लोग शामिल थे. पूरी इमारत करीब 2 घंटे में मलबे में तब्दील हो गई थी. मारे गए लोगों में केवल 291 शव ही ऐसे थे जिनकी ठीक से पहचान की जा सके. गौरतलब है कि इस हमले के बाद भारतीय व्यापारियों ने हजारों टन मलबे को करीब 23 करोड़ रुपए में खरीद लिया. इसमें से निकले लोहा और स्टील को रिसाइकल कर नई इमारतों में इस्तेमाल किया गया था.

अमेरिका ने लिया अपने नागरिकों के खून का बदला

इस दर्दनाक हमले के पीछे अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का हाथ था. फिर अमेरिका ने बदले की कार्रवाई करते हुए 2 मई 2011 को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा को मार गिराया था. हालांकि इसमें पूरे 10 साल लग गए. 13 सालों के बाद वहीं नई इमारत काम करने के लिए खोल दी गई.

ग्राउंड जीरो पर 8 साल में बनी 104 मंजिल की इमारत

पेंटागन को हुए नुकसान के एक वर्ष के अंदर साफ कर दिया गया और उसकी मरम्मत कर दी गई. बिल्डिंग के बगल में पेंटागन स्मारक बनाया गया. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की धवस्ट इमारतों की जगह ग्राउंड जीरो पर बनी नई इमारत 104 मंजिल की है. ये इमारत न्यूयॉर्क या मैनहट्टन ही नहीं बल्कि अमेरिका की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार है. इसका नाम वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर दिया गया है. इस गगनचुंबी इमारत को फिर से बनाने में 8 साल लगे.

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