अवमानना केस : वकील प्रशांत भूषण पर कितनी सख्ती बरतने वाला है सुप्रीम कोर्ट?

दिल्ली : अवमानना मामले में वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट सजा तय करेगा. इससे पहले कोर्ट ने उन्हें बिना शर्त माफी मांगने के लिए समय दिया था, लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया. वकील प्रशांत भूषण ने कहा था वो सजा के लिए तैयार हैं, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ भूषण के खिलाफ अपना फैसला सुनाएगी. मामला वर्तमान और पूर्व चीफ जस्टिस के बारे में भूषण के विवादित ट्वीट का है. 14 अगस्त को कोर्ट ने इन ट्वीट पर प्रशांत भूषण के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए उन्हें अवमानना का दोषी करार दिया था.

अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत सजा के तौर पर वकील भूषण को 6 महीने तक की कैद या 2 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती हैं. प्रशांत भूषण के खिलाफ सजा का आदेश सुबह 11 बजे के करीब आ सकता है.

भूषण द्वारा न्यायालय की तरफ से माफी मांगने के सुझाव को खारिज किए जाने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने 25 अगस्त को शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था शीर्ष अदालत की ओर से ‘‘स्टेट्समैन जैसा संदेश’’ दिया जाना चाहिए और भूषण को शहीद न बनाएं.

तीन न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति मिश्रा ने सजा के मुद्दे पर उस दिन अपना फैसला सुरक्षित रखा था. न्यायमूर्ति मिश्रा दो सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को भूषण को न्यायापालिका के खिलाफ उनके दो अपमानजनक ट्वीट के लिए उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था.

भूषण का पक्ष रख रहे धवन ने भूषण के पूरक बयान का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था कि वह अपने 14 अगस्त के फैसले को वापस ले ले तथा कोई सजा न दे. उन्होंने अनुरोध किया कि न सिर्फ इस मामले को बंद किया जाना चाहिए, बल्कि विवाद का भी अंत किया जाना चाहिए.

अटॉर्नी जनरल के. के वेणुगोपाल ने अदालत से अनुरोध किया कि वह भूषण को इस संदेश के साथ माफ कर दे कि उन्हें भविष्य में ऐसा कृत्य नहीं दोहराना चाहिए. पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल हैं. पीठ ने ट्वीटों को लेकर माफी न मांगने के रुख पर पुनर्विचार के लिए भूषण को 30 मिनट का समय भी दिया था.

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