कोरोना वायरसः अपनी सरकार को कोसते भारत में फँसे ब्रिटिश नागरिक

लॉकडाउन में भारत में फँसे ब्रिटेन के पर्यटकों ने लौटकर अपनी सरकार के रवैये को “लचर” और “शर्मनाक” बताया है.

कुछ ने कहा कि उन्हें किसी भी संबद्ध कर्मचारी से संपर्क करने में घंटों लगे, बात कैसे हो इसे लेकर पूरा भ्रम था और ब्रिटिश अधिकारी “अक्षम और असंवेदनशील” थे.

अभी भी भारत में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि उनसे कहा गया कि उन्हें एक फ़्लाइट में ले जाया जाएगा, मगर बाद में पता चला कि ये जानकारी ग़लत थी.

ब्रिटेन के विदेश और कॉमनवेल्थ कार्यालय या एफ़सीओ का कहना है कि विदेशों से लोगों को लौटाना एक “बड़ा और जटिल” काम है.

डर्बीशायर निवासी 56 वर्षीय ऐंडी हैडफ़ील्ड दो महीने की छुट्टी पर भारत आए थे और गोवा से गत रविवार को वापस लौट पाए जबकि उन्हें तीन सप्ताह पहले आना था.

उन्होंने बताया कि उनकी फ़्लाइट भारत में लॉकडाउन की घोषणा से पहले ही रद्द हो गई थी और घंटों फ़ोन पर बिताने के बाद भी जो ब्रिटिश अधिकारी आया वो किसी भी तरह की मदद की पेशकश नहीं कर सका.

‘और देशों के नागरिक लौट रहे थे’

ऐंडी ने बताया, “मैंने 61 पाउंड दिए और फिर कहा गया – आपका नाम लिस्ट में है मगर कोई फ़्लाइट मिलेगी हम इसका वादा नहीं कर सकते.”

“जर्मनी, बेल्जियम, इटली – हर जगह के लोग लौट रहे थे. ये बहुत शर्मनाक था, सबको लगा कि सरकार को हमारी कोई परवाह नहीं. ”

उन्होंने बताया कि जब 300 से ज़्यादा लोगों को लेकर विमान वापस ब्रिटेन लौटा तो हमसे कहा गया कि अगर ज़रुरी लगे तो आप अपने घर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जा सकते हैं या किसी को आपको ले जाने के लिए बुला सकते हैं.

ऐंडी ने कहा,”ये कुछ नहीं बस अव्यवस्था है“.

37 वर्षीया ब्रिटिश नागरिक चांदनी लडवा गुजरात से लेस्टर सोमवार को पहुँची.

उन्होंने बताया कि वो मार्च की शुरुआत में भारत आई थीं जब ये पता नहीं था कि हालत कितनी गंभीर हो जाएगी और तब ब्रिटेन सरकार ने भी कहा था कि भारत की यात्रा करने में कोई परेशानी नहीं है.

उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी वापसी की फ़्लाइट की जानकारी बस एक दिन पहले मिली और उन्हें रात को एफ़सीओ की ओर से ठीक की गई ट्रांसपोर्ट कंपनी से बहस करनी पड़ी ताकि वो समय पर एयरपोर्ट पहुँच सकें.

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